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घूमने की पूरी जानकारी | उत्तराखंड ट्रेवल गाइड

 घूमने की पूरी जानकारी | उत्तराखंड ट्रेवल गाइड

परिचय

नमस्ते दोस्तों, मैं पंकज, आपका अपना ट्रेवल ब्लॉगर। मूल रूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा का रहने वाला हूं, और हां, मेरी पृष्ठभूमि थोड़ी अलग है – मैंने कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की है। आप सोच रहे होंगे कि एक कंप्यूटर साइंस का छात्र पहाड़ों और प्रकृति के बारे में ब्लॉग क्यों लिख रहा है। दरअसल, आज की इस तेज़-रफ्तार ज़िंदगी में, जहां हर कोई काम, पढ़ाई या शहर की आपाधापी में फंसा हुआ है, प्रकृति से जुड़ना पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरी हो गया है। मेरे अपने अल्मोड़ा में, हमने हमेशा एक शांत, प्रकृति से जुड़ा जीवन देखा है। सुबह की ताज़ी हवा, पक्षियों की चहचहाहट, और दूर दिखती बर्फ से ढकी पहाड़ियां – यह सब हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा है। वहीं, जब मैं पढ़ाई के सिलसिले में शहर में रहा, तो मैंने महसूस किया कि वहां के लोग प्रकृति से कितने कटे हुए हैं। उन्हें हर पल कुछ नया करने की, कहीं भागने की ज़रूरत महसूस होती है, जबकि शांति और स्थिरता के लिए उन्हें थोड़ा रुकना चाहिए, और प्रकृति के करीब जाना चाहिए।

मैंने कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई इसलिए की क्योंकि मुझे समस्याओं को सुलझाना और चीज़ों को समझना पसंद है। टेक्नोलॉजी ने मुझे सिखाया कि हर चीज़ के पीछे एक तर्क और एक व्यवस्था होती है। यही सोच मुझे प्रकृति और पर्यटन की तरफ ले आई। मैंने देखा कि उत्तराखंड में इतनी सुंदरता और इतनी विविधता है, लेकिन कई बार लोग सही जानकारी या भरोसेमंद सलाह के अभाव में यहां की यात्रा नहीं कर पाते। मेरा तकनीकी दिमाग मुझे हर जानकारी को बारीकी से समझने, उसकी प्रामाणिकता जांचने और फिर उसे सरल शब्दों में आप तक पहुंचाने में मदद करता है। मेरा उद्देश्य सिर्फ तस्वीरें दिखाना नहीं है, बल्कि आपको उत्तराखंड की यात्रा के लिए पूरी तरह से तैयार करना है, ताकि आप यहां आएं, प्रकृति की गोद में कुछ पल बिताएं, और यहां की संस्कृति से जुड़ें। मुझे लगता है कि आज के दौर में, प्रकृति के साथ यह जुड़ाव हमें मानसिक शांति और एक नई ऊर्जा देता है, जो किसी भी गैजेट या तकनीक से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण है। इसलिए, बिना किसी अतिशयोक्ति के, मैं आपको उत्तराखंड के उन कोनों से रूबरू कराऊंगा, जो आपके दिल को छू लेंगे। आज मैं आपको ले चलूंगा उत्तराखंड के एक ऐसे ही अद्भुत नज़ारे की ओर, जिसे ‘भारत का मिनी स्विट्ज़रलैंड’ भी कहा जाता है – औली।

औली क्या है और इसका महत्व

तो चलिए, अब बात करते हैं औली की। सरल शब्दों में कहूं, तो औली उत्तराखंड के चमोली ज़िले में स्थित एक बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन और स्कीइंग डेस्टिनेशन है। यह 2,500 से 3,050 मीटर की ऊंचाई पर बसा एक बुग्याल है, यानी एक विशाल घास का मैदान, जो सर्दियों में पूरी तरह बर्फ की चादर से ढक जाता है। औली सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि एक अनुभव है। जब मैं पहली बार यहां आया, तो मुझे लगा जैसे मैं किसी पेंटिंग में आ गया हूं। चारों ओर बर्फ से ढकी विशाल हिमालय की चोटियां, जैसे नंदा देवी, कामेट, मना पर्वत, दूनागिरी, बेथारोली और नीलकंठ, एक अद्भुत नज़ारा पेश करती हैं। ये चोटियां इतनी पास और इतनी भव्य दिखती हैं कि आप बस इन्हें निहारते रह जाते हैं।

उत्तराखंड में औली का महत्व सिर्फ इसकी प्राकृतिक सुंदरता तक ही सीमित नहीं है। इसका एक ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक महत्व भी है। ऐतिहासिक रूप से, औली बद्रीनाथ धाम के मार्ग पर स्थित है, जो चार धाम यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। प्राचीन काल से ही यह क्षेत्र यात्रियों और साधुओं के लिए एक आश्रय स्थल रहा है। जोशीमठ, जो औली का आधार शहर है, आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार मठों में से एक है, जो इसकी आध्यात्मिक गरिमा को बढ़ाता है। प्राकृतिक रूप से, औली हिमालयी वनस्पतियों और जीवों का घर है। यहां के हरे-भरे बुग्याल गर्मियों में मनमोहक लगते हैं, और सर्दियों में ये दुनिया के बेहतरीन स्कीइंग ढलानों में बदल जाते हैं। भारत में स्कीइंग के शौकीनों के लिए औली एक स्वर्ग है। यहां न सिर्फ एडवेंचर पसंद लोगों को अपनी ओर खींचता है, बल्कि शांति और सुकून चाहने वालों के लिए भी यह एक बेहतरीन जगह है, जहां वे प्रकृति की भव्यता में खो सकते हैं। यहां की हवा में एक अलग ही ताज़गी है, जो शहरी प्रदूषण से दूर, सीधे पहाड़ों से आती है। यह जगह हमें सिखाती है कि प्रकृति कितनी विशाल और कितनी शांत हो सकती है, और हमें उस शांति का हिस्सा बनने का मौका देती है।

औली के मुख्य आकर्षण

औली में घूमने और अनुभव करने के लिए कई शानदार जगहें हैं, जो आपकी यात्रा को अविस्मरणीय बना देंगी। मैं आपको कुछ मुख्य आकर्षणों के बारे में बताता हूं, जिन्हें आपको अपनी यात्रा में ज़रूर शामिल करना चाहिए:

स्कीइंग और विंटर स्पोर्ट्स: यह औली का सबसे बड़ा आकर्षण है। अगर आप सर्दियों में (दिसंबर से मार्च) यहां आते हैं, तो आपको बर्फ से ढकी ढलानें मिलेंगी, जो स्कीइंग के लिए एकदम सही हैं। यहां शुरुआती और अनुभवी दोनों तरह के स्कीयर के लिए सुविधाएं उपलब्ध हैं। गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) यहां स्कीइंग कोर्स भी आयोजित करता है। यहां की ढलानें लंबी और चौड़ी हैं, जो स्कीइंग का एक शानदार अनुभव देती हैं। बर्फ पर फिसलते हुए हिमालय की विशाल चोटियों का नज़ारा देखना अपने आप में एक अद्भुत अनुभव है। मुझे याद है, पहली बार मैंने जब स्कीइंग करने की कोशिश की थी, तो कई बार गिरा, लेकिन फिर धीरे-धीरे संतुलन बनाना सीखा। वह अनुभव सचमुच रोमांचक था।

औली रोपवे: यह एशिया के सबसे लंबे रोपवे में से एक है, जिसकी लंबाई लगभग 4 किलोमीटर है। यह जोशीमठ से औली तक चलता है और लगभग 20-25 मिनट की यात्रा में आपको नीचे के हरे-भरे (या सर्दियों में बर्फ से ढके) परिदृश्य और दूर-दूर तक फैले हिमालय के शानदार नज़ारे दिखाता है। रोपवे की सवारी अपने आप में एक आकर्षण है। ऊपर से घाटी और पहाड़ों का विहंगम दृश्य ऐसा होता है, जिसे आप कभी नहीं भूल पाएंगे। यह औली पहुंचने का एक सुविधाजनक और दर्शनीय तरीका भी है।

औली झील (चेनाब लेक): यह एक कृत्रिम झील है, जिसे स्कीइंग ढलानों के लिए बर्फ बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। लेकिन, यह झील भी अपनी सुंदरता के कारण एक पर्यटन स्थल बन गई है। साफ नीले पानी और आसपास के पहाड़ों का प्रतिबिंब इस झील को और भी आकर्षक बनाता है। झील के किनारे बैठकर शांति का अनुभव करना और आसपास के नज़ारों का आनंद लेना बहुत सुखद होता है। हालांकि इसका नाम चेनाब लेक है, लेकिन इसे अक्सर औली लेक के नाम से ही जाना जाता है।

गुरसों बुग्याल: औली से लगभग 3 किलोमीटर की आसान ट्रेक पर स्थित गुरसों बुग्याल एक विशाल घास का मैदान है, जहां से नंदा देवी, त्रिशूल और दूनागिरी जैसी चोटियों के मनमोहक दृश्य दिखाई देते हैं। गर्मियों में यह बुग्याल हरे-भरे घास और रंग-बिरंगे फूलों से भर जाता है, जबकि सर्दियों में यह बर्फ की चादर ओढ़ लेता है। यहां तक की ट्रेक भी अपने आप में एक अनुभव है, जहां आप प्रकृति के करीब महसूस करते हैं। यह ट्रेक ज़्यादा मुश्किल नहीं है और परिवार के साथ भी किया जा सकता है। यहां पहुंचकर खुली हवा में सांस लेना और विशाल मैदान में घूमना एक अलग ही ताज़गी देता है।

क्वारी पास ट्रेक: अगर आप एक अनुभवी ट्रेकर हैं या थोड़ा और रोमांच चाहते हैं, तो औली से शुरू होने वाला क्वारी पास ट्रेक आपके लिए बेहतरीन है। यह ट्रेक आपको घने जंगलों, बर्फ से ढके पहाड़ों और विशाल बुग्यालों से होकर ले जाता है। यह ट्रेक हिमालय के कुछ सबसे शानदार दृश्यों में से एक है और इसे “लॉर्ड कर्ज़न ट्रेल” के नाम से भी जाना जाता है। यह एक बहु-दिवसीय ट्रेक है, जिसके लिए अच्छी शारीरिक तैयारी की ज़रूरत होती है।

नंदा देवी चोटी के दर्शन: औली से नंदा देवी चोटी का नज़ारा बेहद शानदार होता है। यह भारत की दूसरी सबसे ऊंची चोटी है और औली से इसकी भव्यता और विशालता देखकर आप मंत्रमुग्ध हो जाएंगे। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय जब सूरज की किरणें इस चोटी पर पड़ती हैं, तो इसका रंग बदलता है, जो एक अविस्मरणीय दृश्य होता है।

जोशीमठ: औली का बेस टाउन जोशीमठ है, जो धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। यहां आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित ज्योतिर्मठ स्थित है। जोशीमठ में भगवान नरसिंह का प्राचीन मंदिर भी है। यहां आप रोपवे लेने से पहले या बाद में घूम सकते हैं और स्थानीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का अनुभव कर सकते हैं। जोशीमठ में रहने के भी कई विकल्प मिल जाते हैं, खासकर अगर आप औली में सीधे नहीं रहना चाहते।

इन सभी आकर्षणों को देखते हुए, औली सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि एक पूरी यात्रा है जो आपको प्रकृति, रोमांच और शांति का एक साथ अनुभव कराती है।

औली कैसे पहुँचें

औली तक पहुंचना अपेक्षाकृत आसान है, हालांकि यह पहाड़ों में है। आपको अपनी यात्रा की योजना पहले से बना लेनी चाहिए, खासकर अगर आप सर्दियों के मौसम में जा रहे हैं।

हवाई जहाज से: औली का निकटतम हवाई अड्डा देहरादून में जॉली ग्रांट हवाई अड्डा (DED) है, जो औली से लगभग 280 किलोमीटर दूर है। हवाई अड्डे से आप टैक्सी किराए पर ले सकते हैं या जोशीमठ के लिए बस ले सकते हैं। देहरादून से जोशीमठ तक की यात्रा में लगभग 9-10 घंटे लग सकते हैं, जो पहाड़ी सड़कों और मौसम की स्थिति पर निर्भर करता है।

ट्रेन से: औली का निकटतम रेलवे स्टेशन हरिद्वार (HW) है, जो लगभग 273 किलोमीटर दूर है, और ऋषिकेश (RKSH) है, जो लगभग 256 किलोमीटर दूर है। ये दोनों स्टेशन भारत के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़े हुए हैं। रेलवे स्टेशन से आप जोशीमठ के लिए सीधी बस या साझा टैक्सी ले सकते हैं। ट्रेन से यात्रा करना अक्सर आरामदायक होता है और आपको रास्ते में कुछ बेहतरीन नज़ारे देखने को मिलते हैं। हरिद्वार और ऋषिकेश से जोशीमठ तक बसें नियमित रूप से चलती हैं।

सड़क मार्ग से (बस/कार): औली सड़क मार्ग से भी अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है, हालांकि सीधी सड़क औली तक नहीं जाती। आपको पहले जोशीमठ पहुंचना होगा, जो औली का आधार शहर है। दिल्ली, देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे प्रमुख शहरों से जोशीमठ के लिए नियमित बसें उपलब्ध हैं। आप अपनी निजी कार या किराए की टैक्सी से भी यात्रा कर सकते हैं। दिल्ली से जोशीमठ की दूरी लगभग 500 किलोमीटर है और इसमें लगभग 14-16 घंटे लग सकते हैं। अगर आप अपनी कार से जा रहे हैं, तो पहाड़ी रास्तों पर गाड़ी चलाने का अनुभव होना ज़रूरी है। जोशीमठ पहुंचने के बाद, औली पहुंचने के दो मुख्य तरीके हैं:
1. रोपवे: जोशीमठ से औली के लिए रोपवे सबसे लोकप्रिय और सुविधाजनक तरीका है। यह आपको सीधे औली की स्कीइंग ढलानों तक पहुंचाता है। यह यात्रा लगभग 20-25 मिनट की होती है और रास्ते में अद्भुत नज़ारे देखने को मिलते हैं।
2. सड़क मार्ग: जोशीमठ से औली तक एक मोटर योग्य सड़क भी है, लेकिन यह केवल कुछ किलोमीटर की है और सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण बंद हो सकती है। अगर सड़क खुली है, तो आप जोशीमठ से टैक्सी किराए पर ले सकते हैं, जिसमें लगभग 45 मिनट से 1 घंटे का समय लगेगा। हालांकि, मेरा सुझाव है कि आप रोपवे का ही उपयोग करें, क्योंकि यह ज़्यादा सुरक्षित और दर्शनीय है, खासकर सर्दियों में।

कुल मिलाकर, औली तक की यात्रा थोड़ी लंबी हो सकती है, लेकिन जब आप वहां पहुंचेंगे और हिमालय के नज़ारों को देखेंगे, तो आपको लगेगा कि हर मुश्किल इसके लायक थी। यात्रा के लिए हमेशा आरामदायक कपड़े और जूते पहनें और बीच-बीच में रुककर आराम करें।

औली घूमने का सबसे अच्छा समय

औली एक ऐसा पर्यटन स्थल है जो पूरे साल अलग-अलग रंग दिखाता है, और आप किस तरह का अनुभव चाहते हैं, उसके आधार पर घूमने का सबसे अच्छा समय बदल जाता है। मैं आपको दोनों मुख्य मौसमों के बारे में बताता हूं:

दिसंबर से मार्च (सर्दियां – स्कीइंग के लिए):
यह वह समय है जब औली अपनी पूरी महिमा में होता है, खासकर अगर आप स्कीइंग या बर्फ का अनुभव लेना चाहते हैं। दिसंबर के अंत से फरवरी तक भारी बर्फबारी होती है, जो ढलानों को स्कीइंग के लिए एकदम सही बना देती है। इस दौरान पूरा क्षेत्र सफेद बर्फ की चादर से ढक जाता है, और हिमालय की चोटियां और भी शानदार दिखती हैं। तापमान शून्य से नीचे चला जाता है, इसलिए गर्म कपड़े पैक करना अनिवार्य है।
क्यों बेहतर है:
* स्कीइंग और स्नोबोर्डिंग: यह भारत में स्कीइंग का सबसे अच्छा अनुभव प्रदान करता है। * बर्फ से ढके नज़ारे: अगर आप बर्फ के खेल में रुचि नहीं रखते हैं, तब भी बर्फ से ढके पहाड़ और पेड़ देखना एक जादुई अनुभव होता है। * क्रिसमस और नए साल का जश्न: कई लोग इस दौरान यहां छुट्टियां मनाने आते हैं।
इस समय यात्रा के लिए आपको पहले से होटल और रोपवे की बुकिंग कर लेनी चाहिए, क्योंकि यह पीक सीज़न होता है।

मई से अक्टूबर (गर्मियां और मॉनसून के बाद – बुग्याल और ट्रेकिंग के लिए):
यह समय उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो हरियाली, शांत मौसम और ट्रेकिंग का आनंद लेना चाहते हैं। अप्रैल के अंत तक बर्फ पिघलनी शुरू हो जाती है, और मई-जून तक हरे-भरे घास के मैदान (बुग्याल) सामने आ जाते हैं। इस दौरान मौसम सुहावना होता है, दिन में तापमान 10-20 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है, जो ट्रेकिंग और आउटडोर गतिविधियों के लिए आदर्श है।
क्यों बेहतर है:
* हरे-भरे बुग्याल: गुरसों बुग्याल और आसपास के क्षेत्र हरे-भरे घास और जंगली फूलों से भर जाते हैं, जो आंखों को सुकून देते हैं। * ट्रेकिंग और लंबी पैदल यात्रा: मौसम ट्रेकिंग और पैदल घूमने के लिए एकदम सही होता है। आप क्वारी पास जैसे ट्रेक पर भी जा सकते हैं। * शानदार हिमालयी दृश्य: आसमान साफ होने पर हिमालय की चोटियां बहुत स्पष्ट और प्रभावशाली दिखती हैं। * शांत और सुकून भरा अनुभव: भीड़ कम होती है, जिससे आपको शांति और प्रकृति के साथ गहरा जुड़ाव महसूस होता है।
जुलाई-अगस्त (मॉनसून): इस दौरान उत्तराखंड में भारी बारिश होती है। पहाड़ों में भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है और सड़कें अक्सर बंद हो जाती हैं। हालांकि इस समय हरियाली अपने चरम पर होती है, लेकिन यात्रा की सुरक्षा और पहुंच के लिहाज़ से यह सबसे अच्छा समय नहीं है। अगर आप इस दौरान यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो मौसम की जानकारी लेकर ही निकलें।

मेरे हिसाब से, अगर आप स्कीइंग का रोमांच चाहते हैं, तो सर्दियों में आएं, और अगर आप शांत हरियाली और ट्रेकिंग पसंद करते हैं, तो मई से अक्टूबर के बीच का समय चुनें। दोनों ही समय में औली आपको निराश नहीं करेगा, बस आपका अनुभव अलग होगा।

रहने और खाने की व्यवस्था

औली में रहने और खाने की व्यवस्था आपकी पसंद और बजट के अनुसार उपलब्ध है। चूंकि औली एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, इसलिए आपको यहां कई विकल्प मिल जाएंगे।

रहने की व्यवस्था:

* होटल और रिसॉर्ट्स: औली में कई निजी होटल और रिसॉर्ट्स हैं जो आरामदायक प्रवास प्रदान करते हैं। इनमें से कुछ सीधे स्की ढलानों के पास स्थित हैं, जो स्कीइंग के शौकीनों के लिए बहुत सुविधाजनक होता है। गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) का औली में एक बड़ा टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स भी है, जो कमरे, डॉरमेट्री और यहां तक कि स्कीइंग उपकरण भी किराए पर देता है। ये अक्सर पहले से बुक हो जाते हैं, खासकर सर्दियों के पीक सीज़न में। मेरी सलाह है कि आप पहले से ऑनलाइन बुकिंग करके जाएं, खासकर अगर आप भीड़ वाले समय में जा रहे हैं।

* होमस्टे और गेस्ट हाउस: औली में सीधे होमस्टे के विकल्प थोड़े कम हैं, लेकिन जोशीमठ में आपको कई आरामदायक और बजट-फ्रेंडली गेस्ट हाउस और होमस्टे मिल जाएंगे। जोशीमठ में रुकना एक अच्छा विकल्प हो सकता है, खासकर अगर आप औली में महंगे विकल्पों से बचना चाहते हैं। होमस्टे में आपको स्थानीय संस्कृति और जीवनशैली का करीब से अनुभव करने का मौका मिलता है। कई होमस्टे मालिक खुद ही आपको स्थानीय भोजन परोसते हैं।

* बजट विकल्प: जोशीमठ में कई धर्मशालाएं और छोटे होटल भी हैं जो कम बजट में ठहरने की सुविधा देते हैं। अगर आप दोस्तों के साथ या बैकपैकर्स के तौर पर जा रहे हैं, तो ये विकल्प काफी किफायती हो सकते हैं। इन जगहों पर आपको बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन साफ-सफाई और सुरक्षा का ध्यान रखा जाता है।

खाने की व्यवस्था:

औली और जोशीमठ में आपको कई तरह के भोजन विकल्प मिल जाएंगे, लेकिन मेरा सुझाव है कि आप स्थानीय गढ़वाली व्यंजनों का स्वाद ज़रूर चखें।

* स्थानीय पहाड़ी भोजन: आपको दाल, चावल, रोटी, पहाड़ी साग (जैसे कंडाली का साग या लिंगुड़ा), भट्ट की चुड़कानी, फानू, और मंडुए की रोटी जैसे पारंपरिक व्यंजन मिल जाएंगे। यह भोजन सादा, पौष्टिक और स्वादिष्ट होता है। यहां के स्थानीय मसालों का स्वाद आपको पसंद आएगा। कई होमस्टे में आपको घर का बना खाना मिलता है, जो एक अलग ही अनुभव होता है।

* सामान्य भारतीय और चीनी व्यंजन: ज़्यादातर होटलों और रेस्तरां में आपको उत्तर भारतीय व्यंजन जैसे दाल मखनी, पनीर बटर मसाला, छोले भटूरे आदि मिल जाएंगे। साथ ही, मोमोस और नूडल्स जैसे चीनी व्यंजन भी लोकप्रिय हैं। * कैफे और चाय की दुकानें: औली और जोशीमठ में कई छोटे कैफे और चाय की दुकानें हैं, जहां आप गरमागरम चाय, कॉफी, मैगी और सैंडविच का आनंद ले सकते हैं, खासकर ठंडे मौसम में। रोपवे स्टेशन के पास और स्की ढलानों पर भी कुछ छोटी-मोटी खाने-पीने की जगहें मिल जाती हैं।

मेरा व्यक्तिगत सुझाव है कि आप कम से कम एक बार स्थानीय भोजन का स्वाद ज़रूर लें। यह न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि आपको उस जगह की संस्कृति से भी जोड़ता है। और हां, अपनी यात्रा के दौरान हमेशा गर्म पानी पीते रहें, खासकर सर्दियों में।

सावधानियां और ट्रेवल टिप्स

उत्तराखंड की यात्रा, खासकर पहाड़ों की यात्रा, रोमांचक होती है, लेकिन कुछ सावधानियां और टिप्स आपकी यात्रा को सुरक्षित और यादगार बना सकते हैं। अल्मोड़ा से होने

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