आज की तेज़-रफ्तार ज़िंदगी में हम सब कहीं न कहीं अपने भीतर एक खालीपन महसूस करते हैं। सुबह उठना, ऑफिस जाना, स्क्रीन पर घंटों आँखें गड़ाए रहना, और फिर वही भाग-दौड़… ये सब हमारी शहरी ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में हमें अक्सर प्रकृति की गोद में शांति और सुकून की तलाश होती है। मुझे लगता है कि आज उत्तराखंड की यात्रा पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरी होती जा रही है। यह सिर्फ़ घूमने-फिरने की बात नहीं है, बल्कि अपने आप से जुड़ने, अपनी जड़ों को पहचानने और उस प्रकृति के करीब आने की बात है जिसने हमें बनाया है।
मेरा नाम पंकज है, और मैं मूल रूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा से हूँ। मैंने अपनी पढ़ाई कंप्यूटर साइंस में की है। आप सोच रहे होंगे कि एक कंप्यूटर साइंस का छात्र, जो कोड और एल्गोरिदम में उलझा रहता है, पहाड़ों और पर्यटन स्थलों की बातें क्यों करेगा? सच कहूँ तो, मेरी परवरिश अल्मोड़ा की शांत पहाड़ियों में हुई है। बचपन से मैंने यहाँ की स्वच्छ हवा में साँस ली है, पहाड़ों की हरियाली देखी है,