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घूमने की पूरी जानकारी | उत्तराखंड ट्रेवल गाइड

 घूमने की पूरी जानकारी | उत्तराखंड ट्रेवल गाइड

परिचय

नमस्ते दोस्तों! मैं पंकज, अल्मोड़ा, उत्तराखंड से। एक ट्रेवल ब्लॉगर जो कभी कंप्यूटर साइंस का छात्र हुआ करता था। मेरी यात्रा अल्मोड़ा की शांत पहाड़ियों से शुरू हुई और आज, मैं अपने इस ब्लॉग के ज़रिए आप सभी को उत्तराखंड की इसी मिट्टी की महक से जोड़ना चाहता हूँ। आज की तेज़-रफ़्तार शहरी ज़िंदगी में जहाँ हर कोई मोबाइल स्क्रीन और कंप्यूटर के सामने घंटों बिता रहा है, वहाँ उत्तराखंड जैसी जगहों की यात्रा एक ज़रूरत बन गई है, लक्ज़री नहीं।

आप खुद सोचिए, जहाँ शहरों में सुबह की शुरुआत ट्रैफिक के शोर और प्रदूषण से होती है, वहीं अल्मोड़ा में मेरी सुबह पक्षियों के चहचहाने और ताज़ी, ठंडी हवा से होती थी। कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करते हुए मैंने भी घंटों कोड लिखे हैं, रात-रात भर प्रोजेक्ट्स पर काम किया है। लेकिन, जब भी मुझे ब्रेक मिलता, मैं पहाड़ों की तरफ़ निकल पड़ता। मुझे याद है, एक बार मैं एक बहुत बड़े सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट पर काम कर रहा था, और लगातार स्क्रीन देखने से मेरी आँखें थक गई थीं, दिमाग़ सुन्न पड़ने लगा था। ऐसे में मैंने कुछ दिन के लिए सब कुछ छोड़कर पास के किसी गाँव की यात्रा की। वहाँ जाकर मैंने देखा कि कैसे लोग सादगी से जीवन जीते हैं, कैसे प्रकृति के साथ उनका गहरा रिश्ता है। उस यात्रा ने मुझे रिचार्ज कर दिया, मेरा दिमाग़ फिर से फ्रेश हो गया और मैं नए उत्साह के साथ अपने काम पर लौट सका।

यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव है जिसने मुझे समझाया कि टेक्नोलॉजी कितनी भी आगे बढ़ जाए, इंसान का प्रकृति से जुड़ाव उतना ही ज़रूरी है। मेरी कंप्यूटर साइंस की बैकग्राउंड ने मुझे हर जानकारी को गहराई से समझने, लॉजिकल तरीक़े से विश्लेषण करने और फिर उसे सरल शब्दों में आप तक पहुँचाने में मदद की है। मैं यहाँ कोई झूठे वादे या बढ़ा-चढ़ाकर बातें करने नहीं आया हूँ। मेरा मक़सद है कि आपको उत्तराखंड की असली सुंदरता, यहाँ की संस्कृति और पर्यटन स्थलों के बारे में ऐसी जानकारी मिले, जिस पर आप भरोसा कर सकें। मैं चाहता हूँ कि आप भी मेरी तरह यहाँ की यात्रा करके प्रकृति से जुड़ें, अपनी रोज़मर्रा की भागदौड़ भरी ज़िंदगी से एक ब्रेक लें और अपने भीतर की शांति को फिर से पाएं। उत्तराखंड सिर्फ़ एक जगह नहीं, यह एक एहसास है, एक अनुभव है, जिसे हर किसी को एक बार ज़रूर जीना चाहिए।

औली क्या है और इसका महत्व

तो दोस्तों, आज हम जिस ख़ूबसूरत जगह के बारे में बात करने जा रहे हैं, वह है उत्तराखंड का स्वर्ग, औली। सरल शब्दों में कहूँ तो औली गढ़वाल हिमालय की गोद में बसा एक छोटा सा स्कीइंग डेस्टिनेशन और घास का मैदान (बुग्याल) है। यह चमोली ज़िले में समुद्र तल से लगभग 2800 मीटर (9200 फीट) की ऊँचाई पर स्थित है। औली सिर्फ़ एक पर्यटन स्थल नहीं है, यह एक ऐसा अनुभव है जो आपकी आत्मा को सुकून देता है।

औली का महत्व कई मायनों में है। प्राकृतिक रूप से यह अपनी अद्भुत सुंदरता के लिए जाना जाता है। यहाँ से दुनिया की कुछ सबसे ऊँची चोटियों जैसे नंदा देवी, कामेट, माना पर्वत और त्रिशूल का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। सर्दियों में जब बर्फ़ की चादर पूरे औली को ढक लेती है, तो यह स्कीइंग और स्नोबोर्डिंग के शौकीनों के लिए एक जन्नत बन जाता है। भारत में इसे “मिनी स्विट्ज़रलैंड” भी कहा जाता है, और जब आप यहाँ की बर्फ़बारी देखते हैं, तो आपको यह नाम बिल्कुल सही लगेगा।

ऐतिहासिक रूप से, औली का क्षेत्र बद्रीनाथ धाम के रास्ते में पड़ता है। बद्रीनाथ, जो चार धाम यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, यहाँ से कुछ ही दूरी पर स्थित है। इसलिए इस क्षेत्र का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी बहुत गहरा है। यहाँ के स्थानीय लोग, जिन्हें गढ़वाली कहा जाता है, अपनी संस्कृति और परंपराओं से गहरे जुड़े हुए हैं। उनका सरल जीवन और मेहमानवाज़ी आपको मोहित कर लेगी।

औली सिर्फ़ सर्दियों में ही नहीं, बल्कि गर्मियों में भी अपनी हरी-भरी ढलानों और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। तब यहाँ घास के मैदान फूलों से भर जाते हैं, और ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए यह एक शानदार जगह बन जाती है। यहाँ की हवा में एक अलग ही ताज़गी होती है, जो शहरी प्रदूषण से दूर एक नई ऊर्जा देती है। यह वह जगह है जहाँ प्रकृति अपने सबसे शुद्ध रूप में मौजूद है, और हर बार जब मैं यहाँ आता हूँ, तो मुझे ऐसा लगता है जैसे प्रकृति मुझे गले लगा रही हो।

औली के मुख्य आकर्षण

औली में घूमने और अनुभव करने के लिए बहुत कुछ है। यह जगह सिर्फ़ अपनी स्कीइंग के लिए नहीं जानी जाती, बल्कि यहाँ के प्राकृतिक नज़ारे और शांत वातावरण भी किसी को भी मंत्रमुग्ध कर सकते हैं। आइए, औली के कुछ मुख्य आकर्षणों पर नज़र डालते हैं:

औली रोपवे (गोंडोला): यह औली का सबसे बड़ा आकर्षण है। एशिया के सबसे लंबे रोपवे में से एक, यह जोशीमठ से औली तक लगभग 4 किलोमीटर की दूरी तय करता है। जब आप इस रोपवे में ऊपर जाते हैं, तो नीचे की वादियाँ, देवदार के घने जंगल और बर्फ़ से ढकी चोटियों का नज़ारा अविश्वसनीय होता है। यह सिर्फ़ एक सवारी नहीं, यह एक अनुभव है जो आपको ऊँचाई पर ले जाकर प्रकृति का एक अनूठा दृश्य दिखाता है। मेरी सलाह है कि आप इसे ज़रूर अनुभव करें, चाहे आप स्कीइंग के लिए जा रहे हों या सिर्फ़ नज़ारों का आनंद लेने।

स्कीइंग स्लोप्स: औली भारत के बेहतरीन स्कीइंग स्थलों में से एक है। यहाँ के ढलान स्कीइंग के लिए एकदम सही हैं, चाहे आप नौसिखिए हों या एक अनुभवी स्कीयर। यहाँ पर गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) स्कीइंग के कोर्स भी प्रदान करता है। जनवरी और फ़रवरी के महीनों में यहाँ सबसे अच्छी बर्फ़बारी होती है, जो स्कीइंग के लिए आदर्श होती है। शुरुआती लोगों के लिए यहाँ प्रशिक्षित इंस्ट्रक्टर उपलब्ध होते हैं जो आपको स्कीइंग के बेसिक्स सिखाते हैं।

गुरसो बुग्याल (Gurso Bugyal): औली से लगभग 3 किलोमीटर की आसान ट्रेक पर स्थित यह बुग्याल (हरी घास का मैदान) अपने शानदार दृश्यों के लिए जाना जाता है। यहाँ से नंदा देवी, त्रिशूल और धूनागिरी जैसी चोटियों का अद्भुत पैनोरमिक दृश्य दिखाई देता है। गर्मियों में यहाँ हरे-भरे घास के मैदानों में रंग-बिरंगे फूल खिले होते हैं, और सर्दियों में यह पूरी तरह से बर्फ़ से ढका होता है। यहाँ बैठकर बस शांत वातावरण और पहाड़ों की भव्यता को महसूस करना अपने आप में एक ध्यान है।

कुंवारी पास ट्रेक: जो लोग थोड़ा और रोमांच चाहते हैं, उनके लिए कुंवारी पास ट्रेक एक शानदार विकल्प है। यह ट्रेक औली या जोशीमठ के पास से शुरू होता है और इसे “लॉर्ड कर्जन ट्रेल” के नाम से भी जाना जाता है। यह एक मध्यम स्तर का ट्रेक है जो आपको हिमालय के दिल में ले जाता है और रास्ते में आपको घने जंगल, अल्पाइन घास के मैदान और अविश्वसनीय पर्वत श्रृंखलाओं के नज़ारे देखने को मिलते हैं।

औली आर्टिफिशियल लेक: यह दुनिया की सबसे ऊँची मानव निर्मित झीलों में से एक है। इस झील का पानी स्कीइंग ढलानों पर बर्फ़ बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जब प्राकृतिक बर्फ़बारी कम होती है। लेकिन यह सिर्फ़ एक कार्यात्मक झील नहीं है; यह अपने शांत पानी और आसपास के पहाड़ों के प्रतिबिंब के साथ एक ख़ूबसूरत जगह है। सूर्यास्त के समय यहाँ का नज़ारा बहुत ही मनमोहक होता है।

जोशीमठ: औली की यात्रा का बेस कैंप जोशीमठ ही है। यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल भी है, जहाँ आदि शंकराचार्य ने ‘ज्योतिर्मठ’ की स्थापना की थी। जोशीमठ में नरसिंह मंदिर और वासुदेव मंदिर जैसे कई प्राचीन मंदिर हैं। औली जाने वाले ज़्यादातर लोग जोशीमठ में ही ठहरते हैं और यहाँ से रोपवे या सड़क मार्ग से औली जाते हैं। यहाँ आप स्थानीय संस्कृति और जीवनशैली को करीब से देख सकते हैं।

ये सभी आकर्षण मिलकर औली को एक ऐसा पर्यटन स्थल बनाते हैं जहाँ आप प्रकृति, रोमांच और आध्यात्मिकता का एक साथ अनुभव कर सकते हैं। मेरी सलाह है कि आप अपनी यात्रा की योजना इस तरह से बनाएं कि आप इन सभी जगहों का भरपूर आनंद ले सकें।

कैसे पहुँचें

औली तक पहुँचना एक अनुभव है, क्योंकि रास्ता ही अपने आप में सुंदर नज़ारों से भरा होता है। भले ही यह एक पहाड़ी इलाक़ा है, लेकिन यहाँ तक पहुँचने के लिए अच्छे विकल्प उपलब्ध हैं। मुख्य रूप से आपको जोशीमठ पहुँचना होता है, जो औली का निकटतम बड़ा शहर और प्रवेश द्वार है।

हवाई जहाज़ से:

औली का सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा जॉली ग्रांट एयरपोर्ट, देहरादून (DED) है, जो लगभग 270 किलोमीटर दूर है। देहरादून से आप जोशीमठ के लिए टैक्सी या बस ले सकते हैं। टैक्सी का किराया थोड़ा ज़्यादा हो सकता है, लेकिन यह आरामदायक विकल्प है। देहरादून से जोशीमठ पहुँचने में लगभग 8-9 घंटे का समय लग सकता है, जो रास्ते की स्थिति और ट्रैफ़िक पर निर्भर करता है। हवाई जहाज़ से आने वाले लोगों के लिए यह सबसे तेज़ तरीका है, बशर्ते आप देहरादून तक की उड़ान आसानी से प्राप्त कर सकें।

ट्रेन से:

औली का सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन हरिद्वार जंक्शन (HW) है, जो लगभग 273 किलोमीटर दूर है, और ऋषिकेश रेलवे स्टेशन (RKSH), जो लगभग 250 किलोमीटर दूर है। ये दोनों स्टेशन भारत के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़े हुए हैं। हरिद्वार या ऋषिकेश से आप जोशीमठ के लिए सीधी बस या शेयर टैक्सी ले सकते हैं। ट्रेन से यात्रा करना एक किफायती और आरामदायक विकल्प है, खासकर अगर आप लंबी दूरी से आ रहे हैं। हरिद्वार या ऋषिकेश से जोशीमठ पहुँचने में भी लगभग 8-10 घंटे का समय लग सकता है।

सड़क मार्ग से:

यह औली पहुँचने का सबसे आम और सुविधाजनक तरीका है।

  • बस से: दिल्ली के आईएसबीटी आनंद विहार से हरिद्वार, ऋषिकेश या देहरादून के लिए नियमित बसें मिलती हैं। वहाँ से आप जोशीमठ के लिए सीधी बस ले सकते हैं। उत्तराखंड परिवहन निगम की बसें अच्छी कनेक्टिविटी प्रदान करती हैं। जोशीमठ से औली के लिए आप रोपवे या स्थानीय टैक्सी ले सकते हैं (जोशीमठ से औली तक लगभग 15-20 किलोमीटर की सड़क यात्रा है)।
  • निजी वाहन/कार से: यदि आप अपनी कार से यात्रा कर रहे हैं, तो दिल्ली से औली तक की दूरी लगभग 500 किलोमीटर है और इसमें लगभग 12-14 घंटे लग सकते हैं। रास्ता कुछ इस प्रकार होगा: दिल्ली – मेरठ – हरिद्वार/ऋषिकेश – देवप्रयाग – श्रीनगर – रुद्रप्रयाग – कर्णप्रयाग – चमोली – जोशीमठ। सड़क मार्ग से यात्रा करते समय रास्ते में कई ख़ूबसूरत नज़ारे देखने को मिलते हैं, और आप अपनी मर्ज़ी से रुककर इन दृश्यों का आनंद ले सकते हैं। हालांकि, पहाड़ी रास्तों पर गाड़ी चलाने का अनुभव होना ज़रूरी है, खासकर सर्दियों में जब बर्फ़बारी हो सकती है।

महत्वपूर्ण टिप: जोशीमठ से औली तक आप रोपवे (जो लगभग 15-20 मिनट लेता है और शानदार नज़ारे दिखाता है) या सड़क मार्ग से टैक्सी द्वारा पहुँच सकते हैं। सर्दियों में जब बर्फ़बारी होती है, तो कई बार सड़क मार्ग बंद हो जाता है, और रोपवे ही एकमात्र विकल्प बचता है। इसलिए, अपनी यात्रा की योजना बनाते समय मौसम की स्थिति की जाँच ज़रूर कर लें। मेरी सलाह है कि आप जोशीमठ में एक रात रुकें और फिर अगले दिन सुबह रोपवे से औली जाएँ ताकि आप सुबह के साफ़ नज़ारों का पूरा आनंद ले सकें।

घूमने का सबसे अच्छा समय

औली घूमने का सबसे अच्छा समय आपकी प्राथमिकता पर निर्भर करता है, क्योंकि हर मौसम में इसकी अपनी ख़ासियत है। मैं आपको विभिन्न मौसमों के बारे में बताता हूँ ताकि आप अपनी योजना बेहतर तरीक़े से बना सकें।

सर्दियाँ (दिसंबर से मार्च):

अगर आप स्कीइंग और बर्फ़बारी का आनंद लेना चाहते हैं, तो यह औली जाने का सबसे अच्छा समय है। दिसंबर के अंत से मार्च की शुरुआत तक औली पूरी तरह से बर्फ़ की सफेद चादर से ढका रहता है। इस दौरान तापमान शून्य से नीचे चला जाता है, जो स्कीइंग और अन्य शीतकालीन गतिविधियों के लिए आदर्श होता है। जनवरी और फ़रवरी के महीने में बर्फ़ की मोटाई सबसे ज़्यादा होती है, जिससे स्कीइंग के लिए बेहतरीन स्थितियाँ बनती हैं। क्यों बेहतर है: बर्फ़ के खेल, बर्फ़ से ढकी चोटियों के अविश्वसनीय नज़ारे और एक जादुई शीतकालीन वंडरलैंड का अनुभव। ध्यान रखें: अत्यधिक ठंड, कुछ सड़कें बंद हो सकती हैं, और भीड़ भी ज़्यादा हो सकती है। गर्म कपड़े और बर्फ़ के जूते ज़रूर ले जाएँ।

गर्मियाँ (मई से जून):

जो लोग ठंड और बर्फ़ से बचना चाहते हैं, उनके लिए गर्मियाँ औली घूमने का एक शानदार समय है। इस दौरान मौसम सुहाना और हल्का होता है, तापमान 10°C से 20°C के बीच रहता है। बर्फ़ पिघलने लगती है और हरे-भरे घास के मैदान (बुग्याल) अपनी पूरी ख़ूबसूरती में होते हैं। यह ट्रेकिंग, प्रकृति में सैर और पहाड़ों के शांत वातावरण का आनंद लेने के लिए सबसे अच्छा समय है। क्यों बेहतर है: सुहावना मौसम, हरी-भरी वादियाँ, शानदार नज़ारों के साथ ट्रेकिंग और फोटोग्राफी के लिए आदर्श। ध्यान रखें: रातें अभी भी ठंडी हो सकती हैं, इसलिए हल्के गर्म कपड़े साथ रखें।

मानसून (जुलाई से सितंबर):

मानसून के दौरान औली में बहुत बारिश होती है। इस समय पूरी घाटी हरी-भरी हो जाती है और बादल अक्सर पहाड़ों को ढक लेते हैं, जिससे एक अलग ही जादुई और रहस्यमयी माहौल बन जाता है। क्यों बेहतर है: प्रकृति अपनी पूरी हरियाली में होती है, भीड़ कम होती है, और यह शांति पसंद करने वालों के लिए अच्छा हो सकता है। ध्यान रखें: भूस्खलन का ख़तरा बढ़ जाता है, सड़कें अक्सर बंद हो जाती हैं, और ट्रेकिंग थोड़ी मुश्किल हो सकती है। अगर आप इस समय जा रहे हैं, तो मौसम की जानकारी ज़रूर लें और अतिरिक्त सावधानी बरतें। मैं व्यक्तिगत रूप से मानसून में पहाड़ी यात्रा से बचने की सलाह देता हूँ, जब तक कि आप बहुत अनुभवी न हों।

शरद ऋतु (अक्टूबर से नवंबर):

यह भी औली घूमने का एक बेहतरीन समय है। बारिश कम हो जाती है, आसमान साफ़ हो जाता है, और तापमान ठंडा व सुखद होता है। इस दौरान पहाड़ों के नज़ारे बेहद स्पष्ट होते हैं और हवा में एक अलग ही ताज़गी होती है। क्यों बेहतर है: साफ़ आसमान, शानदार पर्वत दृश्य, ट्रेकिंग के लिए आरामदायक मौसम, और ज़्यादा भीड़ नहीं होती। यह उन लोगों के लिए आदर्श है जो शांति से पहाड़ों की सुंदरता का आनंद लेना चाहते हैं। ध्यान रखें: सुबह और शाम के समय काफ़ी ठंड हो सकती है, इसलिए गर्म कपड़े ज़रूर ले जाएँ।

संक्षेप में, अगर आप बर्फ़ और स्कीइंग के शौकीन हैं तो जनवरी-मार्च जाएँ। अगर आप ट्रेकिंग और हरी-भरी प्रकृति का आनंद लेना चाहते हैं तो मई-जून जाएँ। और अगर आप शांत, साफ़ नज़ारे और ठंडी हवा चाहते हैं, तो अक्टूबर-नवंबर सबसे अच्छा है। अपनी पसंद के हिसाब से सही समय चुनें और औली की सुंदरता का अनुभव करें।

रहने और खाने की व्यवस्था

औली में ठहरने और खाने की व्यवस्था आपकी पसंद और बजट के अनुसार उपलब्ध है। चूंकि औली एक छोटा सा पर्यटन स्थल है, इसलिए ज़्यादातर लोग जोशीमठ में अपना बेस बनाते हैं और वहाँ से औली की यात्रा करते हैं।

रहने की व्यवस्था (Accommodation):

औली में:

  • GMVN (गढ़वाल मंडल विकास निगम) गेस्ट हाउस/रिसॉर्ट: औली में GMVN के अपने टूरिस्ट रेस्ट हाउस और स्कीइंग रिसॉर्ट हैं, जो सबसे लोकप्रिय और विश्वसनीय विकल्प हैं। ये अच्छे रखरखाव वाले हैं और यहाँ से पहाड़ों के शानदार नज़ारे दिखाई देते हैं। खासकर स्कीइंग के मौसम में इनकी बुकिंग जल्दी हो जाती है, इसलिए पहले से बुक करना ज़रूरी है।
  • निजी रिसॉर्ट और होटल: औली में कुछ निजी रिसॉर्ट भी हैं जो लक्ज़री और आरामदायक प्रवास प्रदान करते हैं। इनमें हीटिंग की सुविधा और आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध होती हैं। ये थोड़े महंगे हो सकते हैं, लेकिन अनुभव शानदार होता है।

जोशीमठ में (बेस कैंप के रूप में):

  • बजट होटल और गेस्ट हाउस: जोशीमठ में आपको औली की तुलना में ज़्यादा और सस्ते विकल्प मिलेंगे। यहाँ कई छोटे होटल, लॉज और गेस्ट हाउस हैं जो साफ़ और आरामदायक कमरे उचित दामों पर प्रदान करते हैं। यह उन लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प है जो बजट में यात्रा करना चाहते हैं।
  • होमस्टे: जोशीमठ और आसपास के गाँवों में कुछ होमस्टे भी उपलब्ध हैं। होमस्टे में रुकना आपको स्थानीय संस्कृति और जीवनशैली को करीब से समझने का मौका देता है। यहाँ आपको घर जैसा माहौल और स्थानीय भोजन का अनुभव मिलता है।
  • धार्मिक आश्रम: चूंकि जोशीमठ एक धार्मिक केंद्र भी है, यहाँ कुछ आश्रम और धर्मशालाएँ भी हैं जो बहुत ही कम कीमत पर या दान के आधार पर ठहरने की व्यवस्था प्रदान करती हैं।

महत्वपूर्ण टिप: सर्दियों के मौसम में, खासकर स्कीइंग के दौरान, औली में आवास की उपलब्धता कम हो जाती है और कीमतें बढ़ जाती हैं। इसलिए, अपनी यात्रा की योजना बनाते समय कम से कम 2-3 महीने पहले ही अपनी बुकिंग करा लें। ऑफ-सीज़न में आपको आसानी से और सस्ते में कमरे मिल सकते हैं।

खाने की व्यवस्था (Food):

औली और जोशीमठ में खाने के ज़्यादा फ़ैन्सी विकल्प नहीं मिलेंगे, लेकिन आपको स्वादिष्ट और ताज़ा स्थानीय भोजन ज़रूर मिलेगा।

  • स्थानीय गढ़वाली व्यंजन: आपको दाल, चावल, सब्ज़ियाँ, रोटी और अचार जैसे पारंपरिक गढ़वाली भोजन का स्वाद लेने का मौका मिलेगा। पहाड़ी दालें, जैसे भट की चुड़कानी या गहत की दाल, बहुत पौष्टिक और स्वादिष्ट होती हैं। स्थानीय साग जैसे कंडाली का साग भी ट्राई करने लायक है।
  • उत्तर भारतीय भोजन: ज़्यादातर होटलों और रेस्टोरेंट में आपको सामान्य उत्तर भारतीय व्यंजन जैसे दाल-चावल, रोटी-सब्ज़ी, पनीर की सब्ज़ी आदि मिल जाएगी।
  • मैगी और चाय: पहाड़ों में मैगी और गर्मागर्म चाय का अपना ही मज़ा है। औली में विभिन्न पॉइंट्स पर आपको छोटे-छोटे स्टॉल मिलेंगे जहाँ आप मैगी, चाय और स्नैक्स का आनंद ले सकते हैं। बर्फीले मौसम में तो इसकी बात ही कुछ और है।
  • नाश्ता: नाश्ते में आपको आमतौर पर परांठे, पूड़ी-सब्ज़ी या ब्रेड-आमलेट मिल जाएगा।

मेरी सलाह: स्थानीय ढाबों और होमस्टे में खाना खाएं। यहाँ आपको

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