नमस्कार दोस्तों, मैं पंकज, आपका दोस्त और ट्रैवल ब्लॉगर, अल्मोड़ा, उत्तराखंड से। आज के इस भागदौड़ भरे जीवन में, जहाँ हर कोई मोबाइल स्क्रीन और शहरों की चकाचौंध में खोया रहता है, मुझे लगता है कि हम एक बहुत ज़रूरी चीज़ भूलते जा रहे हैं — प्रकृति से जुड़ाव। मैं खुद कंप्यूटर साइंस का छात्र रहा हूँ। मेरा पूरा दिन कोड, एल्गोरिदम और लॉजिक गेट्स के बीच गुजरता था। अल्मोड़ा की शांत पहाड़ियों में पला-बढ़ा एक लड़का, जब शहरी माहौल में आया, तो मैंने महसूस किया कि यह तेज़-रफ्तार ज़िंदगी हमें कहीं न कहीं खोखला कर रही है। बचपन में जहाँ सुबह की पहली किरणें पहाड़ों से टकराती थीं और चिड़ियों की चहचहाहट नींद तोड़ती थी, वहीं शहर में अलार्म और ट्रैफिक का शोर रोज़ की कहानी बन गया। यह अंतर मुझे हमेशा कचोटता था। इसी वजह से मैंने सोचा कि क्यों न अपने तकनीकी ज्ञान का इस्तेमाल उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति और पर्यटन स्थलों को दुनिया तक पहुँचाने के लिए करूँ। मेरा मकसद सिर्फ तस्वीरें या जगहें दिखाना नहीं है, बल्कि एक ऐसा अनुभव साझा करना है जो आपको अपनी जड़ों से जोड़े, आपको प्रकृति की गोद में शांति दे और आपकी आत्मा को तरोताज़ा कर दे। मैं चाहता हूँ कि लोग मेरे ब्लॉग के ज़रिए उत्तराखंड की हर छोटी-बड़ी बात को जानें, यहाँ की यात्रा करें और ज़िंदगी के असली रंगों को महसूस करें। मेरी हर जानकारी समझदारी, तर्क और अपने अनुभवों पर आधारित होगी, ताकि आप मुझ पर पूरा भरोसा कर सकें।
ऋषिकेश क्या है और इसका महत्व
आज हम बात करेंगे उत्तराखंड की एक ऐसी जगह की, जिसे सुनकर ही मन में शांति और रोमांच दोनों एक साथ उमड़ पड़ते हैं — ऋषिकेश। ऋषिकेश सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं है, यह एक एहसास है। इसे “योग नगरी” और “तीर्थ नगरी” के नाम से भी जाना जाता है, और आजकल तो यह “भारत की एडवेंचर कैपिटल” भी बन गया है। सरल भाषा में कहें तो ऋषिकेश गंगा नदी के किनारे बसा एक छोटा सा, लेकिन बेहद महत्वपूर्ण शहर है, जहाँ अध्यात्म, प्रकृति और रोमांच का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
उत्तराखंड में ऋषिकेश का महत्व कई सदियों पुराना है। ऐतिहासिक रूप से, यह माना जाता है कि यहाँ कई ऋषियों और साधुओं ने तपस्या की थी, जिसके कारण इसका नाम ‘ऋषिकेश’ पड़ा। भगवान राम ने अपने भाई लक्ष्मण के साथ यहाँ तपस्या की थी, और लक्ष्मण झूला इसी की स्मृति में बना है। यह स्थान बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की चारधाम यात्रा का प्रवेश द्वार भी माना जाता है, जिससे इसकी धार्मिक अहमियत और भी बढ़ जाती है।
सांस्कृतिक रूप से, ऋषिकेश भारतीय संस्कृति और परंपरा का एक जीवंत केंद्र है। यहाँ आपको दर्जनों आश्रम मिलेंगे जहाँ योग, ध्यान और आयुर्वेद की शिक्षा दी जाती है। शाम को त्रिवेणी घाट पर होने वाली भव्य गंगा आरती एक ऐसा अनुभव है जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। हज़ारों दीयों की रोशनी, मंत्रों का उच्चारण और गंगा नदी का शांत प्रवाह मिलकर एक अलौकिक वातावरण बनाते हैं, जो हर किसी को अपनी ओर खींच लेता है। यहाँ की स्थानीय जीवनशैली, सात्विक भोजन और आध्यात्मिक ऊर्जा आपको अंदर तक शांत कर देती है।
प्राकृतिक रूप से, ऋषिकेश हिमालय की तलहटी में स्थित है, जहाँ गंगा नदी पहाड़ों से उतरकर मैदानी इलाकों में प्रवेश करती है। यहाँ गंगा का पानी बेहद साफ और नीला दिखाई देता है। चारों ओर हरे-भरे पहाड़, घने जंगल और शांत वातावरण इसे प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग बनाता है। गंगा के किनारे बैठना, पहाड़ों की ताज़ी हवा महसूस करना और चिड़ियों की आवाज़ सुनना, ये सब आपको शहरी जीवन के तनाव से दूर एक अलग ही दुनिया में ले जाते हैं। यह सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि एक अनुभव है, जो आपको शारीरिक और मानसिक रूप से रिचार्ज कर देता है।
ऋषिकेश के मुख्य आकर्षण
ऋषिकेश में आपको हर तरह के अनुभव मिलेंगे – चाहे आप शांति की तलाश में हों, रोमांच चाहते हों या फिर प्रकृति की गोद में कुछ पल बिताना चाहते हों। यहाँ के मुख्य आकर्षणों को मैंने अपनी समझ के हिसाब से कुछ इस तरह बांटा है:
1. आध्यात्मिक और धार्मिक स्थल:
- त्रिवेणी घाट और गंगा आरती: यह ऋषिकेश का सबसे पवित्र स्नान घाट है, जहाँ गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों का काल्पनिक संगम माना जाता है। यहाँ स्नान करने से सारे पाप धुल जाते हैं, ऐसी मान्यता है। शाम को यहाँ होने वाली गंगा आरती ऋषिकेश आने वाले हर यात्री के लिए एक ज़रूरी अनुभव है। हज़ारों दीयों की जगमगाहट, पुजारीयों द्वारा मंत्रों का जाप और भक्तों की श्रद्धा, सब मिलकर एक अविस्मरणीय दृश्य बनाते हैं। मैंने खुद कई बार इस आरती में हिस्सा लिया है और हर बार एक नई ऊर्जा महसूस की है।
- लक्ष्मण झूला और राम झूला: ये दो प्रसिद्ध सस्पेंशन ब्रिज हैं जो गंगा नदी पर बने हैं। लक्ष्मण झूला का इतिहास रामायण काल से जुड़ा है, जहाँ लक्ष्मण जी ने जूट की रस्सियों से गंगा पार की थी। आज यह 450 फीट लंबा लोहे का पुल है। इसके आसपास कई मंदिर और आश्रम हैं, जैसे त्रयंबकेश्वर मंदिर (तेरह मंजिला मंदिर)। राम झूला लक्ष्मण झूला से थोड़ा नया और बड़ा है, जो शिवानंद आश्रम और स्वर्ग आश्रम को जोड़ता है। इन दोनों झूलों से गंगा और आसपास के पहाड़ों का नज़ारा अद्भुत लगता है। यहाँ से गुजरते हुए पुल के हिलने का अनुभव भी अपने आप में अनोखा है।
- परमार्थ निकेतन आश्रम: यह ऋषिकेश के सबसे बड़े और प्रसिद्ध आश्रमों में से एक है। यहाँ रोज़ सुबह-शाम योग कक्षाएं और गंगा आरती होती है। इसका शांत वातावरण और हरियाली मन को बहुत भाती है।
- शिवानंद आश्रम और गीता भवन: ये भी ऋषिकेश के कुछ अन्य महत्वपूर्ण आश्रम हैं जहाँ आध्यात्मिक शिक्षा और सात्विक जीवनशैली का अनुभव किया जा सकता है। गीता भवन में पूरी गीता दीवारों पर लिखी हुई है, जो अपने आप में एक अद्भुत कलाकृति है।
2. रोमांचक गतिविधियाँ (एडवेंचर स्पोर्ट्स):
- रिवर राफ्टिंग: ऋषिकेश को भारत की रिवर राफ्टिंग कैपिटल कहा जाता है। गंगा की तेज़ लहरों पर राफ्टिंग का अनुभव बेहद रोमांचक होता है। यहाँ अलग-अलग लंबाई और ग्रेड के राफ्टिंग पैकेज उपलब्ध हैं, जो नौसिखियों से लेकर अनुभवी लोगों तक के लिए उपयुक्त हैं। ब्रह्मपुरी, शिवपुरी, मरीन ड्राइव जैसे पॉइंट्स से राफ्टिंग शुरू होती है। सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है और अनुभवी गाइड हमेशा आपके साथ रहते हैं। मैंने खुद भी कई बार राफ्टिंग का मज़ा लिया है और गंगा की ठंडी लहरों में भीगने का अनुभव मुझे हमेशा याद रहता है।
- बंजी जंपिंग: अगर आप सच में एडवेंचर के शौकीन हैं तो ऋषिकेश में भारत की सबसे ऊँची बंजी जंपिंग (Jumpin Heights) का अनुभव ज़रूर करें। यह लगभग 83 मीटर की ऊँचाई से की जाती है और यहाँ से कूदने का अनुभव अविश्वसनीय होता है। यह पूरी तरह से सुरक्षित है और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन किया जाता है।
- ज़िपलाइन और जाइंट स्विंग: बंजी जंपिंग के अलावा, यहाँ ज़िपलाइन और जाइंट स्विंग जैसी अन्य रोमांचक गतिविधियाँ भी हैं जो आपको पहाड़ों के ऊपर से उड़ने और झूलने का मौका देती हैं।
- ट्रेकिंग और हाइकिंग: ऋषिकेश के आसपास कई छोटे-छोटे ट्रेक और हाइक हैं जो आपको प्रकृति के करीब ले जाते हैं। नीर गढ़ वाटरफॉल एक आसान ट्रेक है जहाँ आप ताज़े पानी के झरने में नहाने का आनंद ले सकते हैं। कुंजापुरी देवी मंदिर ट्रेक थोड़ा और ऊपर है जहाँ से सूर्योदय और सूर्यास्त के नज़ारे बेहद शानदार दिखते हैं।
- योगा और मेडिटेशन: ऋषिकेश को “विश्व की योग राजधानी” कहा जाता है। यहाँ सैकड़ों योगा स्कूल और आश्रम हैं जहाँ आप योग और ध्यान के विभिन्न कोर्स कर सकते हैं। यह शारीरिक और मानसिक शांति पाने का एक बेहतरीन तरीका है।
3. प्राकृतिक सुंदरता:
- गंगा नदी का किनारा: गंगा के किनारे बैठना, बहते पानी की आवाज़ सुनना और पहाड़ों को निहारना अपने आप में एक सुकून भरा अनुभव है। यहाँ कई शांत घाट और रेत के किनारे हैं जहाँ आप आराम कर सकते हैं।
- बीटल्स आश्रम (चौरासी कुटिया): यह आश्रम एक समय में ब्रिटिश बैंड ‘बीटल्स’ के प्रवास के लिए प्रसिद्ध था। आज यह एक शांत, परित्यक्त जगह है जहाँ आप प्रकृति के बीच कला और शांति का अनुभव कर सकते हैं।
ऋषिकेश कैसे पहुँचें
ऋषिकेश भारत के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है, जिससे यहाँ पहुँचना काफी सुविधाजनक हो जाता है। चाहे आप ट्रेन, बस, कार या हवाई जहाज से आना चाहें, आपके पास कई विकल्प मौजूद हैं।
1. हवाई जहाज से:
- ऋषिकेश का सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा देहरादून का जॉली ग्रांट हवाई अड्डा (DED) है, जो यहाँ से लगभग 35 किलोमीटर दूर है।
- यह हवाई अड्डा दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे प्रमुख भारतीय शहरों से सीधी उड़ानों से जुड़ा हुआ है।
- हवाई अड्डे से ऋषिकेश पहुँचने के लिए आप टैक्सी या प्रीपेड कैब किराए पर ले सकते हैं। यह सफ़र आमतौर पर 45 मिनट से 1 घंटे का होता है। उत्तराखंड परिवहन निगम की बसें भी यहाँ से ऋषिकेश के लिए चलती हैं, जो ज़्यादा किफायती विकल्प है।
2. ट्रेन से:
- ऋषिकेश का अपना एक छोटा रेलवे स्टेशन है, ऋषिकेश रेलवे स्टेशन (RKSH)। हालाँकि, यहाँ सभी प्रमुख ट्रेनें नहीं रुकती हैं।
- ज़्यादातर यात्री हरिद्वार जंक्शन (HW) तक ट्रेन लेते हैं, जो ऋषिकेश से लगभग 25 किलोमीटर दूर है। हरिद्वार एक बड़ा रेलवे स्टेशन है और यह दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, लखनऊ और अन्य प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।
- हरिद्वार से ऋषिकेश पहुँचने के लिए आप आसानी से बस, टैक्सी या ऑटो-रिक्शा ले सकते हैं। यह सफ़र लगभग 45 मिनट से 1 घंटे का होता है और रास्ते में आपको गंगा नदी के किनारे का सुंदर नज़ारा भी देखने को मिलता है।
3. बस से:
- ऋषिकेश सड़क मार्ग से भी बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। दिल्ली के आनंद विहार ISBT और कश्मीरी गेट ISBT से ऋषिकेश के लिए सीधी बसें नियमित रूप से चलती हैं। ये बसें सरकारी और निजी दोनों तरह की होती हैं, जिनमें वोल्वो, एसी और नॉन-एसी बसें शामिल हैं।
- दिल्ली से ऋषिकेश की दूरी लगभग 230-250 किलोमीटर है और बस से पहुँचने में लगभग 6-7 घंटे लगते हैं, यह ट्रैफिक और रुकने के पॉइंट्स पर निर्भर करता है।
- उत्तराखंड के अन्य शहरों जैसे देहरादून, हरिद्वार, चंडीगढ़ और अन्य जगहों से भी ऋषिकेश के लिए नियमित बस सेवाएं उपलब्ध हैं।
4. निजी कार/टैक्सी से:
- अगर आप अपनी कार से यात्रा कर रहे हैं या टैक्सी किराए पर लेना चाहते हैं, तो यह भी एक बढ़िया विकल्प है। दिल्ली से ऋषिकेश पहुँचने का रास्ता बहुत अच्छा है।
- रास्ता आम तौर पर दिल्ली – मेरठ – मुजफ्फरनगर – हरिद्वार – ऋषिकेश का होता है। यह दूरी लगभग 230-250 किलोमीटर है और इसमें 5-6 घंटे का समय लग सकता है, जो सड़क की स्थिति और आपके ड्राइव करने की गति पर निर्भर करता है।
- कार से यात्रा करने का फायदा यह है कि आप रास्ते में अपनी पसंद के अनुसार रुक सकते हैं और सुंदर दृश्यों का आनंद ले सकते हैं। पहाड़ी इलाकों में ड्राइविंग करते समय सावधानी बरतना ज़रूरी है, खासकर बरसात के मौसम में।
मेरा सुझाव है कि आप अपनी सुविधा और बजट के अनुसार यात्रा का साधन चुनें। अगर आप जल्दी पहुँचना चाहते हैं तो हवाई जहाज, और अगर प्रकृति का आनंद लेते हुए आना चाहते हैं तो कार या बस एक अच्छा विकल्प है।
ऋषिकेश घूमने का सबसे अच्छा समय
ऋषिकेश की यात्रा की योजना बनाते समय सही समय का चुनाव बहुत ज़रूरी है, क्योंकि यहाँ का मौसम आपके अनुभव को काफी प्रभावित कर सकता है। हर मौसम अपनी कुछ खास बातें लेकर आता है, इसलिए यह आपकी पसंद पर निर्भर करता है कि आप किस तरह का अनुभव चाहते हैं।
1. अक्टूबर से मार्च (सर्दी और हल्की सर्दी):
- यह ऋषिकेश घूमने का सबसे अच्छा समय माना जाता है।
- मौसम: इस दौरान मौसम ठंडा और सुखद होता है। दिन में हल्की धूप और सुहावनी हवा चलती है, जबकि रातें ठंडी होती हैं। तापमान 8°C से 25°C के बीच रहता है।
- क्यों बेहतर है:
- राफ्टिंग और एडवेंचर स्पोर्ट्स: यह रिवर राफ्टिंग और अन्य एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए आदर्श समय है क्योंकि गंगा का जलस्तर सामान्य होता है और मौसम आरामदायक होता है।
- आध्यात्मिक गतिविधियाँ: योग, ध्यान और आश्रमों में होने वाली गतिविधियों के लिए यह सबसे शांत और आरामदायक समय है। गंगा आरती का अनुभव भी इस मौसम में और भी मनमोहक लगता है।
- त्योहार: इस दौरान दीपावली, होली जैसे कई त्योहार आते हैं, जब ऋषिकेश का माहौल और भी जीवंत हो जाता है। अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव भी मार्च में आयोजित होता है, जो योग प्रेमियों के लिए एक बड़ा आकर्षण है।
- ट्रेकिंग: आसपास के पहाड़ों में ट्रेकिंग के लिए भी यह मौसम बहुत अच्छा है।
- सुझाव: अगर आप इस समय आ रहे हैं तो हल्के ऊनी कपड़े और जैकेट ज़रूर साथ रखें, खासकर शाम और सुबह के लिए।
2. अप्रैल से जून (गर्मी की शुरुआत):
- यह समय भी ऋषिकेश घूमने के लिए ठीक है, खासकर उन लोगों के लिए जो ज़्यादा भीड़भाड़ से बचना चाहते हैं।
- मौसम: दिन में गर्मी थोड़ी बढ़ जाती है, तापमान 25°C से 40°C तक पहुँच सकता है। लेकिन सुबह और शाम का मौसम काफी सुहावना रहता है।
- क्यों बेहतर है:
- राफ्टिंग: गर्मी के मौसम में भी राफ्टिंग का मज़ा लिया जा सकता है, क्योंकि गंगा का ठंडा पानी आपको गर्मी से राहत देता है।
- कम भीड़: इस समय पर्यटकों की भीड़ थोड़ी कम होती है, जिससे आप शांति से जगह का आनंद ले सकते हैं।
- बजट यात्रा: होटल और अन्य खर्चों में थोड़ी कमी आ सकती है।
- सुझाव: हल्के कपड़े, टोपी, धूप का चश्मा और सनस्क्रीन साथ रखें। पर्याप्त पानी पीते रहें और दिन के सबसे गर्म समय में बाहर निकलने से बचें।
3. जुलाई से सितंबर (मानसून):
- यह समय ऋषिकेश घूमने के लिए आमतौर पर कम पसंद किया जाता है।
- मौसम: इस दौरान भारी बारिश होती है। पहाड़ों पर भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। गंगा का जलस्तर काफी बढ़ जाता है और नदी का बहाव तेज़ हो जाता है। तापमान 25°C से 35°C के बीच रहता है।
- क्यों कम बेहतर है:
- राफ्टिंग बंद: भारी बारिश के कारण सुरक्षा कारणों से रिवर राफ्टिंग और अन्य वॉटर स्पोर्ट्स अक्सर बंद कर दिए जाते हैं।
- भूस्खलन का खतरा: पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन और सड़कों के बंद होने की संभावना रहती है, जिससे यात्रा बाधित हो सकती है।
- कम दृश्यता: बारिश और बादलों के कारण पहाड़ों के नज़ारे स्पष्ट नहीं दिख पाते।
- क्यों कुछ लोगों को पसंद आ सकता है:
- अगर आपको हरियाली और बारिश का मौसम पसंद है, तो आप यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता का एक अलग ही रूप देख सकते हैं। चारों ओर की प्रकृति धुलकर और भी ज़्यादा हरी-भरी हो जाती है।
- अगर आप सिर्फ शांति और ध्यान के लिए आ रहे हैं और एडवेंचर स्पोर्ट्स में रुचि नहीं रखते, तो यह समय आपको कम भीड़ और शांत वातावरण दे सकता है।
- सुझाव: वाटरप्रूफ कपड़े, छाता या रेनकोट, और मजबूत जूते ज़रूर साथ रखें। यात्रा से पहले मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी ज़रूर लें।
तो संक्षेप में, अगर आप रोमांच और आध्यात्मिक शांति दोनों का अनुभव करना चाहते हैं, तो अक्टूबर से मार्च सबसे अच्छा समय है। अगर आप भीड़ से बचना चाहते हैं और गर्मी में राफ्टिंग का मज़ा लेना चाहते हैं, तो अप्रैल से जून भी विचार किया जा सकता है। मानसून में सिर्फ तभी आएं जब आप सिर्फ शांति और हरियाली का अनुभव करना चाहते हों और एडवेंचर स्पोर्ट्स में आपकी कोई रुचि न हो।
रहने और खाने की व्यवस्था
ऋषिकेश में आपको हर तरह के यात्रियों के लिए रहने और खाने की शानदार व्यवस्था मिल जाएगी, चाहे आपका बजट कुछ भी हो। यहाँ आपको लक्ज़री रिसॉर्ट्स से लेकर किफायती होमस्टे और आध्यात्मिक आश्रम तक सब कुछ मिलेगा, और खाने के मामले में भी यहाँ विविधता की कोई कमी नहीं है।
रहने की व्यवस्था:
- होटल और रिसॉर्ट्स: ऋषिकेश में कई बेहतरीन होटल और रिसॉर्ट्स हैं जो आधुनिक सुख-सुविधाओं के साथ उपलब्ध हैं। गंगा के किनारे स्थित कुछ रिसॉर्ट्स आपको शानदार नज़ारे और शांत वातावरण प्रदान करते हैं। आप अपनी पसंद और बजट के अनुसार मुनि की रेती, लक्ष्मण झूला, राम झूला या तपवन जैसे इलाकों में होटल ढूंढ सकते हैं। मुनि की रेती और लक्ष्मण झूला के पास आपको ज़्यादा भीड़भाड़ और पर्यटन की गतिविधियाँ मिलेंगी, जबकि तपवन थोड़ा शांत और प्रकृति के करीब है।
- होमस्टे और गेस्ट हाउस: अगर आप स्थानीय संस्कृति का अनुभव करना चाहते हैं और बजट में यात्रा कर रहे हैं, तो होमस्टे एक बेहतरीन विकल्प है। कई स्थानीय लोग अपने घरों को यात्रियों के लिए खोलते हैं, जहाँ आपको घर जैसा खाना और गर्मजोशी भरा आतिथ्य मिलता है। ये अक्सर शहर के मुख्य इलाके से थोड़ा दूर, शांत जगहों पर होते हैं। गेस्ट हाउस भी एक अच्छा और किफायती विकल्प है।
- आश्रम: ऋषिकेश को ‘योग नगरी’ कहा जाता है, इसलिए यहाँ कई आश्रम हैं जो यात्रियों को रहने की सुविधा प्रदान करते हैं। परमार्थ निकेतन, शिवानंद आश्रम और ओमकारा आश्रम जैसे बड़े आश्रम आपको आध्यात्मिक माहौल में रहने का मौका देते हैं। यहाँ आमतौर पर रहने की जगह साधारण होती है और सात्विक भोजन भी प्रदान किया जाता है। कई आश्रम योग और ध्यान की कक्षाओं में भाग लेने वाले यात्रियों के लिए भी रियायती दरें प्रदान करते हैं। यह एक बहुत ही अनूठा और सस्ता विकल्प हो सकता है, लेकिन आपको आश्रम के नियमों का पालन करना होगा।
- कैंपिंग: अगर आप रोमांच पसंद करते हैं, तो राफ्टिंग पैकेज के साथ रिवर साइड कैंपिंग एक अद्भुत अनुभव है। गंगा के किनारे टेंट में रात बिताना, तारों को निहारना और अलाव के चारों ओर बैठना एक अविस्मरणीय याद बन जाता है। ये कैंप आमतौर पर शिवपुरी और आसपास के इलाकों में होते हैं।
खाने की व्यवस्था: